
मोदी सरकार 3.0 का एक साल: विकास बरकरार, लेकिन आर्थिक चुनौतियाँ जस की तस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के पहले साल में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। एक ओर जहां वित्त वर्ष 2024-25 में देश की जीडीपी 6.5% की दर से बढ़ी — जिसमें आखिरी तिमाही में 7% से ज्यादा की मजबूत बढ़त देखने को मिली — वहीं दूसरी ओर पुरानी आर्थिक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
इस साल की शुरुआत में भी कृषि क्षेत्र की मजबूती, सेवाओं में रफ्तार, और औद्योगिक उत्पादन में कुछ सुधार की वजह से घरेलू गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं।
लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। निजी क्षेत्र की कम पूंजी निवेश, शहरी क्षेत्रों में कमजोर उपभोग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धीमी रिकवरी, और घरेलू खर्च में तनाव जैसी समस्याएं अब भी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। 11 साल की कोशिशों के बावजूद इन मुद्दों पर सरकार की पकड़ पूरी नहीं बन पाई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ वैश्विक व्यापार और निवेश प्रवाह पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, भारत के लिए ट्रेड डाइवर्जन और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव जैसे मौके भी सामने आ सकते हैं। लेकिन मौजूदा व्यापार समझौतों और निर्यात क्षेत्र की अनिश्चितताओं के बीच रास्ता आसान नहीं है।
You may also like
Archives
Calendar
| M | T | W | T | F | S | S |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ||||||
| 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
| 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
| 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
| 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | |
Leave a Reply